"माँ"
जिसके हाथों पहला निवाला खाया,
उन हाथों का सहलाना अब भी याद है,
जिस गोद में भरा है सुकून,
माँ.. तेरा आंचल सबसे खास है..
डर जाती थी जो घर देर से आता था,
कल टीका लगा कर विदा किया,
एक अश्क भी ना बहाया तूने,
वीर सपूत कह कर मुझे सौंप दिया..
मुस्कुराना तू याद करके,
वह बचपना मेरा गया नहीं,
एक साड़ी ले आया हूँ तेरी मैं,
जिससे लगे कि तू है यहीं..
वतन को जरूरत है मेरी,
तो दिन रात सेवा उसकी करता हूँ,
तुझसा प्यार करती है मुझे,
जिस मिट्टी को भी माँ कहता हूँ..
सरहद पर तैनात हूँ हर पल,
करना तू एक ही दुआ रब से,
तुझमें मेरी जिंदगी की शुरुआत हुई,
धरती माँ की जमीन पर ही मेरी साँसें थमे ।
***
-साक्षी शाह
