Wednesday, 1 April 2015

"तन्हा छोड़ गए"



#Peshawar_Attack_Pakistan #December16,2014 

A heart-wrenching terrorist attack on an Army School of Pakistan which took lives of the innocent students, the teachers and left their families cry for the vaccum it created in their lifes. It really shook the hearts of people not only of the particular country but other ones too. They weeped, by just looking at the pictures and watching the videos which got viral later...

Coudn't resist writing a poem on the deadliest attack happened that day!


गूंजी फ़िज़ाओं में सिर्फ आवाज़ हज़ारों गोलियों की

और थम ही गयी धड़कने कुछ मासूम दिलों की

सूरज की किरणों को छुपा, छाया अँधेरा हर ओर,
टूट गयी वोह हस्ती खेलती ज़िन्दगी की डोर, 

हथेलियों से जा रहे थे लिखने अपनी राह, पन्नों पर,
पर लिखा ही न था, लकीरों में उनके, आना लौट कर,

फ़ैल गयी हर कोने में स्याही दहशत की,
कोरे कागज़ों ने ओढ़ ली, चादर लाल सी,

खून से रंग गए, अरमान नन्हीं जानों के,
दर्द के अश्क़ बहे, फिर रब की भी आँखों से,

नम हुए हज़ारों, देख बच्चों की निर्दोष काया,
नादाँ ही थे सारे, साथ रहेगा अब जिनका साया,

हर रात जिस गोद में रख सर, सोते थे सुकूं से,
आज उसी आँचल को कर गए सूना, वोह बच्चे माओं के,

और जनाज़े में, लाशों के रूप में, उठे वे दुलारे सभी,
शाम होते ही जो, काँधे पर बैठ पिता के, खेलते थे कभी,

ले गए साथ अपने, मुस्कराहटों का आशियाँ,
रूह में साँस नहीं रही, बसी अब सिर्फ खामोशियाँ,

रुला कर अपनों को, चले गए खुदा के द्वारे,
आसमाँ को करेंगे अब रौशन, वे शहीद सितारे.

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