लहरों को ही चाहा तुमने,
बीच समंदर से हारे हो..
गहराई में ढूंढा है मैंने,
तुम कश्तियों के सहारे हो..
अब वक्त नहीं लौटेगा वो
जब जज़्बात बयाॅं कर जाती थी..
जहां ठहर न सकती हूॅं अब कभी,
जाना मैंने, तुम वैसे किनारे हो..
---
very good
very good
ReplyDelete